फतेहपुर जनपद की खागा तहसील अंतर्गत किशनपुर स्थित तुर्की नाला (यमुना जलग्रहण क्षेत्र) में किए गए निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। किशनपुर से दादो तक बने यमुना पुल एप्रोच मार्ग में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी और करोड़ों रुपये की कथित बंदरबांट के आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे प्रकरण को जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक धन से सीधे जुड़ा बताते हुए प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
NGT नियमों का खुला उल्लंघन
आरोप है कि तुर्की नाला क्षेत्र, जो यमुना का संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्र है, वहां PWD द्वारा नाला पाटकर अवैध रूप से सड़क/मार्ग का निर्माण कराया गया। यह निर्माण राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों और पर्यावरणीय मानकों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है। पहली बारिश में ही बह गया निर्माण स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली ही बारिश में मिट्टी और सीमेंट आधारित यह निर्माण बह गया, जिससे कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर सवाल खड़े हो गए। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य गैर-वैज्ञानिक और अत्यंत घटिया तरीके से किया गया।यमुना की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़
निर्माण के दौरान यमुना की प्राकृतिक धारा को संकुचित और बाधित किया गया, जिससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भविष्य में बाढ़, कटान और जनसुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।करोड़ों खर्च, काम नाममात्र
मरम्मत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाने के बावजूद धरातल पर कार्य नाममात्र होने का आरोप है। इसे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठी है।स्थानीय आबादी पर बढ़ा खतरा तुर्की नाला संकरा होने से हर बरसात में जलभराव, कटान और आवागमन बाधित होने की आशंका बनी रहती है। इससे आसपास के गांवों के लोगों की सुरक्षा और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
वैज्ञानिक समाधान की मांग
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय ने जनहित में मांग की है कि यमुना पुल के पिलरों को तुर्की नाला तक बढ़ाया जाए, ताकि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे और भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके स्वतंत्र जांच की मांग
उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय/स्वतंत्र जांच कराकर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि इस मामले को सदन में प्रश्न, ध्यानाकर्षण और चर्चा के माध्यम से मजबूती से उठाया जाए।प्रवीण पांडेय
पर्यावरण पहरूवा, राष्ट्रीय अध्यक्ष बुंदेलखंड राष्ट्र समिति
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