फतेहपुर में शादी-ब्याह के पीक सीजन के बीच मिलावटखोरों का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और जिम्मेदार खाद्य विभाग की भूमिका गंभीर सवालों के घेरे में है। थरियांव, खागा और बिंदकी तहसील क्षेत्रों में खुलेआम मिलावटी पनीर और घटिया सामग्री से बनी मिठाइयों की सप्लाई की जा रही है, लेकिन विभाग की ओर से कोई सख्त और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही। सूत्रों के मुताबिक भारी मांग का फायदा उठाकर बाजारों में नकली पनीर, सिंथेटिक खोया और संदिग्ध मिठाइयां ऊंचे दामों पर बेची जा रही हैं। शादी समारोहों और बड़े आयोजनों में यही मिलावटी खाद्य सामग्री धड़ल्ले से परोसी जा रही है, जिससे आम लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खाद्य विभाग की सक्रियता केवल त्योहारों तक ही सीमित दिखाई देती है। त्योहारों पर औपचारिक छापेमारी कर खानापूर्ति करने वाला विभाग शादी सीजन में पूरी तरह निष्क्रिय और मौन बना हुआ है, जिससे मिलावटखोरों के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
जिले में न तो लगातार सैंपलिंग की ठोस कार्रवाई दिख रही है और न ही किसी बड़े मिलावटखोर पर कठोर दंडात्मक कदम, जो विभाग की कार्यशैली पर गंभीर लापरवाही और उदासीनता की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़े पैमाने पर चल रही मिलावट की सूचना के बावजूद विभाग कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए है?अगर तत्काल सख्त अभियान चलाकर पनीर और मिठाइयों की जांच नहीं की गई तो यह मिलावटी कारोबार किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा को जन्म दे सकता है। अब देखना होगा कि खाद्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाता है या फिर मिलावटखोरों के सामने यूं ही चुप्पी साधे बैठा रहता है।
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